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Saturday, December 25, 2010

उर्दू : पर्दा भी और पुर असर भी

हमारे क़ारईन हज़रात उर्फ़ प्यारे पाठको , हम उर्दू लिखते हैं और वह भी गाढ़ी । हम ऐसा क्यों करते हैं ?
हम बताएंगे बाद में पहले आप क़यास लगा लीजिए ख़ूब अच्छी तरह और तब तक आप हमारा यह कलाम देखिए जो हमने छोड़ा है "अमन के पैग़ाम" पर ।

@ MAsoom साहेब ! हम आज सलाम करने भी आए हैं और कलाम करने भी ।
हुआ यूं कि आपके ब्लाग से धुआं उठता देखकर मेरे गधे ने अपने अंदाज़ मेँ चैट की और यहां ला छोड़ा । मैंने शेख़चिल्ली को दौड़ा दिया कि पानी और कंबल लेकर आ जाए पीछे पीछे और यहां आकर देखा तो धुआं निकला यज्ञ की आग का । सारे अंदेशे ढेर निकले औल्लो जी , केक भी काटे जा रहे हैं ।
ऐसे फ़ोटू माSUम साहेब पहले ही दिखा दिए होते तो गिरी बाबू पहले ही दोस्त बन गए होते और गिरी बाबू सैट तो समझो सब सैट । अब तो ब्लाग संसार में अमन आ ही गया समझो ।
चलता हूं फ़ायर ब्रिगेड वालों को रोक दूं वर्ना सारा केक वो ही चट कर जाएंगे और हां , हमने लिखना ज़रूर बाद में शुरू किया है ब्लागर बड़े हैं लिहाज़ा अभी मत छापिएगा हमारा पैग़ाम , हमें बाद वालों में रखना । हमारे पैग़ाम का साईज़ भी हमारी इज़्ज़त जितना ही बड़ा है। ईमानदारी से बताईये कै दिन लगे हमारे पैग़ाम को जोड़ने में ?

# पैग़ाम देने के शौक़ में हम ज़रा ज्यादा ही लंबा पैग़ाम दे बैठे । दरअस्ल हमें लंबी चीजें ही पसंद हैं फ़ितरतन और हमारे गधे को भी बल्कि उसकी गधैय्या तक को ।
ख़ैर अपनी अपनी पसंद है । आपकी पसंद क्या है ?

2 comments:

एस.एम.मासूम said...

आप किस्मत वाले हैं क्यों की आप के लेख़ का एक हिस्सा जो "अमन के पैग़ाम" का था ग़ायब है...उसे पूरा कर देंन

एस.एम.मासूम said...

कुछ नया लिखें तो सब आयेंगे