Popular Posts

Saturday, December 25, 2010

(अमन वर्मा नहीं बल्कि) अमन कैसे आयेगा ?

शरीफ लोग तो शराफ़त से ही रहते आये हैं लेकिन शरारत करने वालों को जब तक सरकार दुलत्तियां खाने के लिये हमारे गधे के पीछे खड़ा न करेगी , अमन क़ायम नहीं हो सकता ।
केवल राम को मासूम से कहां डर है और मासूम को रूपचंद शास्त्री का ख़ौफ़ कब है ?
लेकिन इन दोनों के बच्चों का अपहरण करने वाले ग़ुंडे हों या सरकार बनाने की हवस में क़बर में पैर और चिता में सिर रखे हुए बुड्ढे सियासतदां हों, इनकी भड़काई आग से कोई भी महफ़ूज़ नहीं है । न ये किसी का पयामे अमन सुनते हैं और न मानते हैं ।
शरीफ़ लोगों को शरीफ़ लोगों का पयामे अमन देना एक नेक काम है लेकिन मसले के हल के लिये ज़रूरी है कि समाज में इतनी बेदारी लाई जाये कि हुकूमत करने वाले या चाहने वाले सियासतदां आम भोले भाले लोगों को एक दूसरे से न लड़ा पायें और जो लड़ायें वे हमारे गधे की दुलत्तियां खायें ।

8 comments:

Pratik Maheshwari said...

बात तो सही कही है आपने..
पर काम बड़ा कठिन है जिसके लिए शिक्षित लोगों को प्रयासरत रहना होगा हमेशा.. और आशा है की रहेंगे भी..

आभार

"एक लम्हां" पढने ज़रूर आएं ब्लॉग पर..

केवल राम said...

सही कहा है ...शुक्रिया

एस.एम.मासूम said...

भाई अगर यह किसी का पयाम ए अमन ना सुनते हैं ना मानते हैं तो बेदारी कैसे लाई जाए? इस सवाल के जवाब के बग़ैर सभी बाएँ बेकार साबित होती है.
प्रतीक जी आज इस ब्लॉगजगत मैं सभी शिक्षित हैं लेकिन यही दो नज़र भी रखते हैं...इंसान इन के लिएय इंसान नहीं होता , हिन्दू या मुसलमान हुआ करता है.,..

Akshita (Pakhi) said...

अच्छा लिखा आपने...'पाखी की दुनिया' में भी आपका स्वागत है.

: केवल राम : said...

नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें

संजय भास्कर said...

नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें

Mukesh Kumar Sinha said...

:)

achchha laga pahli baar aakar!!

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

पूजा जी, खरी बात की आपने। मेरी ओर से नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं स्‍वीकारें।

---------
पति को वश में करने का उपाय।