
आदमी के बहुत से रूप हैं। जितने रूप असली दुनिया में हैं उतने ही इस छलावे की दुनिया में भी हैं। लोग दुखी हैं। वे दिल बहलाने की खातिर इस सच्ची झूठी दुनिया की सैर पर आते हैं और यहां भी उनकी मुठभेड़ असली दुनिया की परेशानियों से हो जाती है। झगड़े-टंटे उन्हें परेशान करते हैं, मुझे भी परेशान करते हैं। यही कारण है कि ब्लाग बनाकर भी मैं कुछ करने से बचता रहा परंतु यही तो समय है जबकि मैं कुछ सेवा कर सकता हूं। सो मैं थोड़े समय में से बहुत थोड़ा सा निकाल कर आपके जहां में कदम धर रहा हूं। मेरा स्वागत जरा ढंग से कर लीजो।
आदमीनामा
यां आदमी पे जान को वारे है आदमी
और आदमी पे तेग़ के मारे है आदमी
पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी
चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी
और सुन के दौड़ता है सो है वह भी आदमी
चलता है आदमी ही मुसाफ़िर ही, ले के माल
और आदमी ही मारे है फांसी गले में डाल
यां आदमी ही सैद है और आदमी है जाल
सच्चा भी आदमी ही निकलता है, मेरे लाल
और झूठ का भरा सो है वह भी आदमी
और आदमी पे तेग़ के मारे है आदमी
पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी
चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी
और सुन के दौड़ता है सो है वह भी आदमी
चलता है आदमी ही मुसाफ़िर ही, ले के माल
और आदमी ही मारे है फांसी गले में डाल
यां आदमी ही सैद है और आदमी है जाल
सच्चा भी आदमी ही निकलता है, मेरे लाल
और झूठ का भरा सो है वह भी आदमी
25 comments:
बहुत बढ़िया ...आगे बढ़ो ..शुभकामनायें
चलते -चलते पर आपका स्वागत है ....
पोस्ट तो किसी अक्ल मंद की लिखी लगती है . जी आज के युग मैं ज्ञानी को शेखचिल्ली कहते हैं
पोस्ट तो किसी अक्ल मंद की लिखी लगती है . जी आज के युग मैं ज्ञानी को शेखचिल्ली कहते हैं
चलो श्रीगणेश तो हुआ टिप्पणियों का . अब किसी तरह पंजीकरण की भूल भुलैय्याँ भी पार करूँगा .
बस आपका सहारा चाहिए .
अपनी पोस्ट का उद्घाटन भी हुआ तो राम से हुआ , केवल राम से हुआ .
उत्तम , अति उत्तम . शुभ लक्षण , बड़ा अच्छा शकुन है .
... और दूसरे भाई एक मुस्लिम हैं . यह भी अच्छा है . अपना ब्लॉग हिन्दू मुस्लिम सबके बीच लोकप्रिय होगा .
आज के युग मैं ज्ञानी को शेखचिल्ली कहते हैं
masoom ji ne bilkul sahi kha hai
सच्चा भी आदमी ही निकलता है, मेरे लाल
और झूठ का भरा सो है वह भी आदमी
...........बहुत खूब, लाजबाब !
आदत.......मुस्कुराने पर
तिलयार में छाया ब्लॉगरों का जादू .............संजय भास्कर
नई पोस्ट पर आपका स्वागत है
चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी
और सुन के दौड़ता है सो है वह भी आदमी
इस रचना का रचियता है असली आदमी !!!
... vaah vaah ... bahut khoob !!!
.
शेखचिल्ली जी,
आपने जो अपना परिचय दिया है उससे लगता है आपने दुनिया को काफी गहराई से देखा है । और आपने 'आदमी' की जो परिभाषा दी है , उससे पूरी तरह सहमत हूँ।
आभार।
.
शेखचिल्ली से थोड़े वाकिफ थे, लेकिन उनके पिता का पता अब लगा है. आदमी का रूप भी आपने जबरदस्त खोजा है. वैसे कहा जाता है कि पचीस-तीस साल के बाद दम्पति की शक्ल-सूरत मिलने लगती है और दस साल बीतते-बीतते 'पैट-मास्टर' का चेहरा भी.
@ राहुल सिंह ! कुछ pat master ऐसे भी होते हैं जिनके साथ रहकर उनके pat की भी शकल बदल जाती है ।
विश्वास न हो तो हमारे साथ रहकर खुद ही देख लो .
ब्लॉग जगत
में आपका स्वागत है
dabirnews.blogspot.com
और आदमी ही मारे है फांसी गले में डाल
यां आदमी ही सैद है और आदमी है जाल
'रचना का अलबेला अरमान'
इस शीर्षक से ख़ादिम ने दूसरी बार कुछ लिखने की कोशिश की है ।
यह रचना अलबेला खतरीय जी की प्रतियोगिता में शामिल होने की ग़र्ज़ से लिखी गई है ।
जब यह आपके सामने आए तो मेहरबानी करके इसे निन्दा या आलोचना का नाम न दिया जाए ।
वर्ना मेरे शेख़चिल्ली को बहुत सदमा होगा ।
उस बेचारे को पहले ही अपने अंडे फूटने का गम है ।
मेरी कहानी में मेरा गधा भी है बिना गधी के । कहानी के अंत में गधा वह करने के लिए भागता है जो कि एक बिल्कुल अलबेला विचार है ।
रचना अनोखी और अछूती है । इसमें अलबेला को बिना नक़ाब के आप सभी देख सकते है । उनकी महानता को यह लेख उजागर करता है ।
रचना गर जवान है तो अलबेला महान है
कामेडी और संस्पेंस के साथ ब्लाग संसार की गुदगुदाती सच्चाईयां ,
बहुत जल्द होंगी आपके सामने .
@ ZEAL जी ! आप सफल है , क़ाबिलियत आपकी यहां सबको तसलीम है ।
निंदक के घर में तो कोई बहन बेटी नहीं होती इसलिए यहां टैम काटने चला आता है ।
जब उसकी बेटी कोई ब्लाग बनाएगी तब इसका किया धरा उसे झेलना पड़ेगा ।
आपके दुख को ये नापाक बदबख़्त तब समझेंगे ।
आप अटल हैं ये अब मैं भी जान गया हूं ।
ब्लॉग जगत में आपका हार्दिक स्वागत!
फूलों की बगिया के समान महकती इस ब्लॉग वाटिका में आप जन-मन के अन्तर्मन को स्पर्श करती हुई रचनाऐं प्रकाशित करेगें ऐसी आशा है।
अगर आपको उचित लगे तो कभी - कभी राष्ट्रवादी और सामयिक विचारों पर आधारित इस ब्लॉग
हिन्दु-गाथा http:// hindugatha.blogspot.com
पर भी दस्तक देवें, हमें भी सम्बल मिलेगा, धन्यवाद
Achcha prayash hai, jari rakhein...
ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है...
बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति| आभार|
इस नए और सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!
@ संगीता जी और स्वागत करने वाले सभी साहिबान का बहुत बहुत शुक्रिया ।
हम आपकी बात से पूरी तरह से सहमत आज के युग मै कोई भी सच्चाई नहीं कह पाता दोस्त जो लिखते हैं वो भी डर - डर कर पर आपकी बात मै वो सच्चाई है जिसका कोई मुकाबला नहीं मुझे आपका ब्लॉग बेहद पसंद आया !
बधाई दोस्त !
आगाज़ अच्छा है .बधाई !
इतनी अच्छी शुरूआत करने के बाद रूक क्यों गये?
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