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Saturday, November 27, 2010

आदमीनामा


आदमी के बहुत से रूप हैं। जितने रूप असली दुनिया में हैं उतने ही इस छलावे की दुनिया में भी हैं। लोग दुखी हैं। वे दिल बहलाने की खातिर इस सच्ची झूठी दुनिया की सैर पर आते हैं और यहां भी उनकी मुठभेड़ असली दुनिया की परेशानियों से हो जाती है। झगड़े-टंटे उन्हें परेशान करते हैं, मुझे भी परेशान करते हैं। यही कारण है कि ब्लाग बनाकर भी मैं कुछ करने से बचता रहा परंतु यही तो समय है जबकि मैं कुछ सेवा कर सकता हूं। सो मैं थोड़े समय में से बहुत थोड़ा सा निकाल कर आपके जहां में कदम धर रहा हूं। मेरा स्वागत जरा ढंग से कर लीजो।
आदमीनामा
यां आदमी पे जान को वारे है आदमी
और आदमी पे तेग़ के मारे है आदमी
पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी
चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी
और सुन के दौड़ता है सो है वह भी आदमी
चलता है आदमी ही मुसाफ़िर ही, ले के माल
और आदमी ही मारे है फांसी गले में डाल
यां आदमी ही सैद है और आदमी है जाल
सच्चा भी आदमी ही निकलता है, मेरे लाल
और झूठ का भरा सो है वह भी आदमी

28 comments:

केवल राम said...

बहुत बढ़िया ...आगे बढ़ो ..शुभकामनायें
चलते -चलते पर आपका स्वागत है ....

एस.एम.मासूम said...

पोस्ट तो किसी अक्ल मंद की लिखी लगती है . जी आज के युग मैं ज्ञानी को शेखचिल्ली कहते हैं

एस.एम.मासूम said...

पोस्ट तो किसी अक्ल मंद की लिखी लगती है . जी आज के युग मैं ज्ञानी को शेखचिल्ली कहते हैं

शेखचिल्ली का बाप said...

चलो श्रीगणेश तो हुआ टिप्पणियों का . अब किसी तरह पंजीकरण की भूल भुलैय्याँ भी पार करूँगा .
बस आपका सहारा चाहिए .

शेखचिल्ली का बाप said...

अपनी पोस्ट का उद्घाटन भी हुआ तो राम से हुआ , केवल राम से हुआ .
उत्तम , अति उत्तम . शुभ लक्षण , बड़ा अच्छा शकुन है .

शेखचिल्ली का बाप said...

... और दूसरे भाई एक मुस्लिम हैं . यह भी अच्छा है . अपना ब्लॉग हिन्दू मुस्लिम सबके बीच लोकप्रिय होगा .

संजय भास्कर said...

आज के युग मैं ज्ञानी को शेखचिल्ली कहते हैं
masoom ji ne bilkul sahi kha hai

संजय भास्कर said...

सच्चा भी आदमी ही निकलता है, मेरे लाल
और झूठ का भरा सो है वह भी आदमी
...........बहुत खूब, लाजबाब !

आदत.......मुस्कुराने पर
तिलयार में छाया ब्लॉगरों का जादू .............संजय भास्कर
नई पोस्ट पर आपका स्वागत है

Sunil Kumar said...

चिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमी
और सुन के दौड़ता है सो है वह भी आदमी
इस रचना का रचियता है असली आदमी !!!

'उदय' said...

... vaah vaah ... bahut khoob !!!

ZEAL said...

.

शेखचिल्ली जी,

आपने जो अपना परिचय दिया है उससे लगता है आपने दुनिया को काफी गहराई से देखा है । और आपने 'आदमी' की जो परिभाषा दी है , उससे पूरी तरह सहमत हूँ।

आभार।

.

Rahul Singh said...

शेखचिल्‍ली से थोड़े वाकिफ थे, लेकिन उनके पिता का पता अब लगा है. आदमी का रूप भी आपने जबरदस्‍त खोजा है. वैसे कहा जाता है कि पचीस-तीस साल के बाद दम्‍पति की शक्‍ल-सूरत मिलने लगती है और दस साल बीतते-बीतते 'पैट-मास्‍टर' का चेहरा भी.

शेखचिल्ली का बाप said...

@ राहुल सिंह ! कुछ pat master ऐसे भी होते हैं जिनके साथ रहकर उनके pat की भी शकल बदल जाती है ।
विश्वास न हो तो हमारे साथ रहकर खुद ही देख लो .

Tausif Hindustani said...

ब्लॉग जगत
में आपका स्वागत है
dabirnews.blogspot.com

Tausif Hindustani said...

और आदमी ही मारे है फांसी गले में डाल
यां आदमी ही सैद है और आदमी है जाल

शेखचिल्ली का बाप said...

'रचना का अलबेला अरमान'
इस शीर्षक से ख़ादिम ने दूसरी बार कुछ लिखने की कोशिश की है ।
यह रचना अलबेला खतरीय जी की प्रतियोगिता में शामिल होने की ग़र्ज़ से लिखी गई है ।
जब यह आपके सामने आए तो मेहरबानी करके इसे निन्दा या आलोचना का नाम न दिया जाए ।
वर्ना मेरे शेख़चिल्ली को बहुत सदमा होगा ।
उस बेचारे को पहले ही अपने अंडे फूटने का गम है ।
मेरी कहानी में मेरा गधा भी है बिना गधी के । कहानी के अंत में गधा वह करने के लिए भागता है जो कि एक बिल्कुल अलबेला विचार है ।
रचना अनोखी और अछूती है । इसमें अलबेला को बिना नक़ाब के आप सभी देख सकते है । उनकी महानता को यह लेख उजागर करता है ।
रचना गर जवान है तो अलबेला महान है
कामेडी और संस्पेंस के साथ ब्लाग संसार की गुदगुदाती सच्चाईयां ,
बहुत जल्द होंगी आपके सामने .
@ ZEAL जी ! आप सफल है , क़ाबिलियत आपकी यहां सबको तसलीम है ।
निंदक के घर में तो कोई बहन बेटी नहीं होती इसलिए यहां टैम काटने चला आता है ।
जब उसकी बेटी कोई ब्लाग बनाएगी तब इसका किया धरा उसे झेलना पड़ेगा ।
आपके दुख को ये नापाक बदबख़्त तब समझेंगे ।
आप अटल हैं ये अब मैं भी जान गया हूं ।

Nirankush Aawaz said...

लेखन के मार्फ़त नव सृजन के लिये बढ़ाई और शुभकामनाएँ!
-----------------------------------------
जो ब्लॉगर अपने अपने ब्लॉग पर पाठकों की टिप्पणियां चाहते हैं, वे वर्ड वेरीफिकेशन हटा देते हैं!
रास्ता सरल है :-
सबसे पहले साइन इन करें, फिर सीधे (राईट) हाथ पर ऊपर कौने में डिजाइन पर क्लिक करें. फिर सेटिंग पर क्लिक करें. इसके बाद नीचे की लाइन में कमेंट्स पर क्लिक करें. अब नीचे जाकर देखें :
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अब इसमें नो पर क्लिक कर दें.
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आलेख-"संगठित जनता की एकजुट ताकत
के आगे झुकना सत्ता की मजबूरी!"
का अंश.........."या तो हम अत्याचारियों के जुल्म और मनमानी को सहते रहें या समाज के सभी अच्छे, सच्चे, देशभक्त, ईमानदार और न्यायप्रिय-सरकारी कर्मचारी, अफसर तथा आम लोग एकजुट होकर एक-दूसरे की ढाल बन जायें।"
पूरा पढ़ने के लिए :-
http://baasvoice.blogspot.com/2010/11/blog-post_29.html

रामदास सोनी said...

ब्लॉग जगत में आपका हार्दिक स्वागत!
फूलों की बगिया के समान महकती इस ब्लॉग वाटिका में आप जन-मन के अन्तर्मन को स्पर्श करती हुई रचनाऐं प्रकाशित करेगें ऐसी आशा है।
अगर आपको उचित लगे तो कभी - कभी राष्ट्रवादी और सामयिक विचारों पर आधारित इस ब्लॉग
हिन्दु-गाथा http:// hindugatha.blogspot.com
पर भी दस्तक देवें, हमें भी सम्बल मिलेगा, धन्यवाद

रामदास सोनी said...

ब्लॉग जगत में आपका हार्दिक स्वागत!
फूलों की बगिया के समान महकती इस ब्लॉग वाटिका में आप जन-मन के अन्तर्मन को स्पर्श करती हुई रचनाऐं प्रकाशित करेगें ऐसी आशा है।
अगर आपको उचित लगे तो कभी - कभी राष्ट्रवादी और सामयिक विचारों पर आधारित इस ब्लॉग
हिन्दु-गाथा http:// hindugatha.blogspot.com
पर भी दस्तक देवें, हमें भी सम्बल मिलेगा, धन्यवाद

Manish Pandey said...

Achcha prayash hai, jari rakhein...

फ़िरदौस ख़ान said...

ब्लॉग जगत में आपका स्वागत है...

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति| आभार|

Surendra Singh Bhamboo said...

ब्लाग जगत की दुनिया में आपका स्वागत है। आप बहुत ही अच्छा लिख रहे है। इसी तरह लिखते रहिए और अपने ब्लॉग को आसमान की उचाईयों तक पहुंचाईये मेरी यही शुभकामनाएं है आपके साथ
‘‘ आदत यही बनानी है ज्यादा से ज्यादा(ब्लागों) लोगों तक ट्प्पिणीया अपनी पहुचानी है।’’
हमारे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।

मालीगांव
साया
लक्ष्य

हमारे नये एगरीकेटर में आप अपने ब्लाग् को नीचे के लिंको द्वारा जोड़ सकते है।
अपने ब्लाग् पर लोगों लगाये यहां से
अपने ब्लाग् को जोड़े यहां से

कृपया अपने ब्लॉग पर से वर्ड वैरिफ़िकेशन हटा देवे इससे टिप्पणी करने में दिक्कत और परेशानी होती है।

संगीता पुरी said...

इस नए और सुंदर से चिट्ठे के साथ हिंदी ब्‍लॉग जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

शेखचिल्ली का बाप said...

@ संगीता जी और स्वागत करने वाले सभी साहिबान का बहुत बहुत शुक्रिया ।

Minakshi Pant said...

हम आपकी बात से पूरी तरह से सहमत आज के युग मै कोई भी सच्चाई नहीं कह पाता दोस्त जो लिखते हैं वो भी डर - डर कर पर आपकी बात मै वो सच्चाई है जिसका कोई मुकाबला नहीं मुझे आपका ब्लॉग बेहद पसंद आया !
बधाई दोस्त !

veerubhai said...

आगाज़ अच्छा है .बधाई !

देवेन्द्र पाण्डेय said...

इतनी अच्छी शुरूआत करने के बाद रूक क्यों गये?