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Friday, December 10, 2010

जो उलझ कर रह गई है फ़ाइलों के जाल में
गांव तक वो रौशनी आएगी कितने साल में

बूढ़ा बरगद साक्षी है किस तरह से खो गई
रमसुधी की झोंपड़ी सरपंच की चौपाल में

खेत जो सीलिंग के थे सब चक में शामिल हो गए
हमको पट्टे की सनद मिलती भी है तो ताल में

जिसकी कीमत कुछ न हो इस भीड़ के माहौल में
ऐसा सिक्का ढालना क्या जिस्म की टकसाल में
~~~~~~~:-*
अब आपको दिक्कत आ सकती है कुछ अल्फ़ाज़ को समझने में , तो अपुन तो लफ़ड़ा ही नहीं पालता मतलब बताने का .
खुद टक्कर मारो प्यारो .

लेकिन दीवार में नहीं बल्कि इस वेबसाइट में -
www.weboword.com
इस वेबसाइट में हर शब्द को चित्र के साथ समझाया गया है .

और यह सर्च इंजन भी आपको पसंद आएगा -
www.favitt.com
यह दूसरे सर्च इंजन भी दर्शाता है और अगर दूसरे सर्च इंजनों में है वह चीज़ जो कि आप खोज रहे हैं तो पेज की दाहिनी तरफ़ उसे भी दिखाता है .

देखो , आपने एक पंथ दो काज तो देखा होगा मगर हमने कर दिए तीन तीन काज .
ख़ुश ?

5 comments:

बवाल said...

एक बहुत ही ख़ूबसूरत सच कहा आपने,
मिस्टर फ़ादर ऑफ़ शेख़ चिल्ली।

ZEAL said...

सुदर कविता के साथ वेब साईट की अच्छी जानकारी के लिए आभार ।

एस.एम.मासूम said...

एक अच्छी कविता और ज्ञानवर्धन लिंक

DR. ANWER JAMAL said...

@ शेख़ साहब ! आप एक अच्छे टिप्पणीकार हैं , यह तो मैं जानता हूं लेकिन आप एक प्रतिभाशाली लेखक भी हैं , यह अब सामने आया ।
देर आयद , दुरूस्त आयद !

ख़ुश आमदीद !

आपके सर्च इंजन को ट्राई किया , अच्छा लगा ,

शुक्रिया !!

Minakshi Pant said...

बहुत खूबसूरती से अपनी बात को कह भी दी और पूछते हो समझे या नहीं ?
बहुत सुन्दर अभ्व्यक्ति दोस्त !
पड़कर बहुत अच्छा लगा !
आगे के लिए शुभ कामनाएं !